जिसने जीवन जीना सिखाया,
उस हर गुरु को मेरा प्रणाम।
जिसने अँधियारे पथ पर चलकर,
बनाया उज्ज्वल मेरा धाम॥
माँ ने ममता का सागर देकर,
त्याग और सेवा का पाठ पढ़ाया।
पिता ने संघर्षों की अग्नि में,
जीवन का साहस समझाया॥
विद्यालय के पूज्य गुरुओं ने,
ज्ञान का दीप जलाया है।
अक्षर अक्षर अमृतबनकर,
जीवन को सफल बनाया है॥
आध्यात्मिक गुरु ने समझाया,
ईश्वर बाहर नहीं, भीतर है।
मन निर्मल हो, कर्म पवित्र हों,
यही सच्चा जीवन मंत्र है॥
मेरे मित्र भी गुरु बनकर,
हर पल मुझको राह दिखाते।
सच का आईना सामने रखकर,
भूलों से मुझे बचाते॥
और सबसे बड़ी गुरु मेरी पत्नी,
जिसने मौन में ज्ञान सुनाया।
कभी धैर्य से, कभी मुस्कान से,
जीवन का हर अर्थ बताया॥
घर को मंदिर, प्रेम को पूजा,
कर्तव्य को उत्सव बनाया।
अपने त्याग और समर्पण से,
मुझको बेहतर इंसान बनाया॥
मैं जितना भी शीश झुकाऊँ,
गुरुओं का ऋण उतर न पाए।
उनकी कृपा की एक किरण ही,
जीवन को स्वर्णिम कर जाए॥
आओ आज प्रण लें मिलकर,
गुरुओं का मान बढ़ाएँगे।
उनके आदर्शों पर चलकर ही,
भारत का गौरव गाएँगे॥
गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर।
गुरु ही जीवन का प्रकाश हैं,
गुरु ही ईश्वर का सुंदर स्वर॥
सभी गुरुओं को गुरु पूर्णिमा की कोटि कोटि वंदन।
Warm Regards,
गौरव सेंगर
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