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दादी की सूनी चौखट
04 Aug 2026 01:46 AM
बेटे गिनते धन दौलत
न धन की थी वह रखवाली,न सोने चाँदी की थी शान।ममता जिसकी पूँजी बनकर,भरती रहती सबकी जान॥ बेटे गिनते धन दौलत को,घरआँगन में उठते प्रश्न।किसके हिस्से खेत खलिहान,किसको मिलेगा धन संपन्न॥